वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनका प्रशासन ईरान के खिलाफ कई बेहद कड़े विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है, जिनमें संभावित सैन्य कार्रवाई भी शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और जल्द ही कोई निर्णय लिया जा सकता है।
रविवार को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान ‘एयर फोर्स वन’ में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान ने कोई ऐसी ‘लाल रेखा’ पार कर ली है, जिससे जवाबी कार्रवाई जरूरी हो जाए। इस पर उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि वे ऐसा करना शुरू कर रहे हैं। हम स्थिति पर बहुत गंभीरता से नजर रखे हुए हैं। सेना भी इस पर विचार कर रही है और हम कई बेहद कड़े विकल्पों पर काम कर रहे हैं।” ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्हें ईरान की स्थिति पर हर घंटे रिपोर्ट दी जा रही है। उन्होंने यह खुलासा किया कि ईरान के नेताओं ने उनसे संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान में जारी हालात पर प्रतिक्रिया के विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी जाएगी। इस बैठक में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, शुरुआती चरण में होने के कारण किसी अंतिम फैसले की उम्मीद नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ईरान में सरकार विरोधी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देना, ईरानी सैन्य और नागरिक ठिकानों पर गुप्त साइबर हमले, अतिरिक्त प्रतिबंध लगाना और सैन्य कार्रवाई शामिल हैं। इसके अलावा एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के टर्मिनल ईरान भेजने की संभावना भी टटोली जा रही है।
पेंटागन ने फिलहाल संभावित सैन्य हमलों के लिए किसी अतिरिक्त बल की तैनाती नहीं की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कार्रवाई होती है, तो क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों की सुरक्षा के लिए भी संसाधन जुटाने होंगे। हाल ही में अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और उसके स्ट्राइक ग्रुप को भूमध्य सागर से लैटिन अमेरिका भेज दिया है, जिसके बाद इस समय मध्य पूर्व और यूरोप में कोई अमेरिकी विमानवाहक पोत तैनात नहीं है।
इस बीच, ईरान की संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने पहले कार्रवाई की, तो ईरान मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत कर ईरान, सीरिया और अन्य मध्य पूर्वी मुद्दों पर चर्चा की। गौरतलब है कि ईरान में रियाल की भारी गिरावट और लंबे समय से चली आ रही आर्थिक मुश्किलों के विरोध में दिसंबर के अंत से कई शहरों में प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों की संख्या बढ़ने की भी रिपोर्टें सामने आ रही हैं।
