
सियोल। दक्षिण कोरिया के प्रमुख विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ कोरिया (DPK) ने प्रधानमंत्री हान डक-सू के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया है। देश के संवैधानिक न्यायालय ने घोषणा की है कि वह सोमवार सुबह 10 बजे इस पर अपना फैसला सुनाएगा। हालांकि, न्यायालय ने अब तक राष्ट्रपति के 3 दिसंबर के मार्शल लॉ की घोषणा से जुड़े महाभियोग परीक्षण पर निर्णय की तारीख घोषित नहीं की है।
कोरिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री हान डक-सू के महाभियोग का निर्णय राष्ट्रपति यूं सूक येओल को हटाने की संभावनाओं का संकेत दे सकता है।
महाभियोग प्रस्ताव के प्रमुख आरोप
महाभियोग प्रस्ताव में हान डक-सू के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रपति यूं सूक येओल के मार्शल लॉ लागू करने में कथित संलिप्तता।
- संवैधानिक न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से इनकार।
- यून के खिलाफ विद्रोह के आरोपों की जांच के लिए स्थायी विशेष वकील नियुक्त करने से इनकार।
- राष्ट्रपति यून और प्रथम महिला किम कीन ही के खिलाफ विशेष वकील विधेयकों को लागू करने में विफलता।
- पूर्व सत्तारूढ़ पीपुल पावर पार्टी (PPP) के नेता हान डोंग-हून के साथ राज्य के मामलों के प्रबंधन का प्रयास।
प्रधानमंत्री हान डक-सू की प्रतिक्रिया
हान ने अपने महाभियोग को नेशनल असेंबली में पेश किए गए सभी आरोपों को अमान्य बताया। उनका कहना है कि उन्होंने राष्ट्रपति के मार्शल लॉ निर्णय का विरोध किया था और सैनिकों की लामबंदी में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
क्या होगा अगला कदम?
- यदि न्यायालय महाभियोग को बरकरार रखता है, तो हान को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया जाएगा।
- अगर महाभियोग खारिज होता है, तो उन्हें कार्यवाहक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के रूप में बहाल कर दिया जाएगा।
इस फैसले को लेकर दक्षिण कोरियाई राजनीति में भारी उथल-पुथल मची हुई है, और सोमवार को आने वाला निर्णय देश की सत्ता संरचना पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।