उलानबटार। भारत के उभरते हुए बॉक्सर विश्वनाथ सुरेश (पुरुष 50 किग्रा – फ्लाईवेट) ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने यूथ स्तर से सीनियर सर्किट तक का सफर बेहद प्रभावशाली तरीके से तय किया है और अब खुद को देश के सबसे होनहार मुक्केबाजों में शामिल कर लिया है। चेन्नई, तमिलनाडु से आने वाले विश्वनाथ का यह प्रदर्शन क्षेत्र के लिए भी गर्व का क्षण है।
2026 की शुरुआत में ही विश्वनाथ ने अपनी बादशाहत कायम कर दी थी। उन्होंने एलीट मेन्स नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर 50 किग्रा वर्ग में भारत के नंबर-1 बॉक्सर का दर्जा हासिल किया। फाइनल में उन्होंने ऋषि सिंह को 5-0 से हराकर एकतरफा जीत दर्ज की।
विश्वनाथ की सफलता की नींव उनके शानदार यूथ करियर में पड़ी। 2022 में आईबीए यूथ मेन्स वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। इसके बाद एएसबीसी एशियन यूथ बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2022 में भी स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का दम दिखाया।
सीनियर स्तर पर भी उनका प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। उन्होंने एशियन अंडर-22 बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2024 में ब्रॉन्ज मेडल जीता और फिर 2025 में चेन्नई में आयोजित बीएफआई फेडरेशन कप में गोल्ड अपने नाम किया।
तकनीकी रूप से मजबूत विश्वनाथ अपनी तेज़ी, फुर्ती और रिंग में शानदार समझ के लिए जाने जाते हैं। दूरी बनाए रखने की उनकी क्षमता और सटीक पंच उन्हें फ्लाईवेट वर्ग में बेहद खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बनाते हैं।
नेशनल चैंपियन बनने के बाद उन्हें एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2026 के लिए भारतीय टीम में चुना गया। उलानबटार में जारी इस प्रतियोगिता में उन्होंने 4 अप्रैल को बड़ा उलटफेर करते हुए कजाकिस्तान के मौजूदा विश्व चैंपियन और दुनिया के नंबर-1 बॉक्सर संझार ताशकेनबे को हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। इसके साथ ही उनका पदक पक्का हो गया है।
आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण ले रहे विश्वनाथ को बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) और इंस्पायर एसएससीबी का भी सहयोग मिल रहा है। एक सफल युवा खिलाड़ी से लेकर देश के शीर्ष फ्लाईवेट बॉक्सर बनने तक का उनका सफर उनकी मेहनत, निरंतरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता की मजबूत संभावनाओं को दर्शाता है।
