डीडवाना। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को दिए गए आरक्षण को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पंचायत राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था, तब पुरुषों ने यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि महिलाओं को आरक्षण तो दिया जा रहा है, लेकिन क्या वे घूंघट से बाहर भी आ पाएंगी।
वसुन्धरा राजे ने कहा कि इस फैसले के बाद गांवों की महिलाएं घूंघट से बाहर आईं और उन्होंने जिला प्रमुख, प्रधान और सरपंच जैसे महत्वपूर्ण पदों को पूरी क्षमता के साथ संभाला। उन्होंने कहा कि यह आरक्षण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।
पूर्व मुख्यमंत्री यह बातें श्री बांगड़ महिला महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव के दौरान कही। कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। राजे ने कहा कि आजादी के समय महिला साक्षरता दर केवल 9 प्रतिशत थी, जो आज बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद राजनीति में महिलाओं को अब भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरुषों की बराबरी पर लाने के लिए महिलाओं के अधिकारों की रक्षा महिलाओं को स्वयं, महिलाओं के लिए और महिलाओं के द्वारा करनी होगी। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब देश की बेटियां सर्वोच्च पद तक पहुंच सकती हैं, तो डीडवाना की बेटियां भी पीछे क्यों रहें। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं स्थानीय विधायक यूनुस ख़ान और राजपाल शेखावत भी उपस्थित रहे।
