
मीरजापुर। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की निर्मम हत्या ने पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।
राष्ट्रीय ग्रामीण पत्रकार संघ के अध्यक्ष सौरभ ने इस हत्याकांड की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जब तक मृतक पत्रकार के परिजनों को पूरी तरह से न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों और 12 अन्य राज्यों के प्रदेश प्रभारियों को पत्र भेजकर इस लड़ाई को कमजोर न पड़ने देने का आह्वान किया है।
सौरभ ने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई राजनेता या प्रभावशाली व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसकी खबरें जोर-शोर से प्रकाशित की जाती हैं, लेकिन जब एक निर्भीक पत्रकार अपने कर्तव्य पथ पर शहीद होता है, तो उसकी खबरों को दबा दिया जाता है, मानो वह सिर्फ एक अदालती नोटिस की तरह हो। उन्होंने अफसोस जताया कि आखिर अपनों के साथ ऐसा भेदभाव क्यों किया जाता है?
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि आज के दौर में निष्पक्ष पत्रकारिता खतरे में है। कई खबरें दबाव में लिखवाई जाती हैं या फिर उन्हें पूरी तरह से हटा दिया जाता है। यह पत्रकारिता धर्म के खिलाफ है। सौरभ ने स्पष्ट किया कि जब तक पत्रकार समाज और देश के हित में नहीं सोचेंगे, तब तक मूल्यनिष्ठ पत्रकारिता की उम्मीद नहीं की जा सकती। बदलते परिवेश में लोकतंत्र के इस चौथे स्तंभ को मजबूत करने के लिए निष्पक्ष, निर्भीक, ईमानदार और पवित्र पत्रकारिता की सबसे अधिक आवश्यकता है।
प्रदेश के पत्रकारों ने एकजुट होकर सरकार से यह मांग की है कि इस हत्या की निष्पक्ष जांच की जाए और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी पत्रकार न्याय और सच की आवाज उठाने से डरें नहीं।