लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रगति पोर्टल (प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन) ने मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिमम गवर्नेंस की अवधारणा को प्रभावी रूप से साकार किया है। इसके माध्यम से न केवल निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है, बल्कि समय और लागत की बर्बादी पर भी प्रभावी रोक लगी है।
मंगलवार को अपने सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर आयोजित पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद डिजिटलीकरण को प्राथमिकता दी। इससे पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने इसकी नींव रखी थी। इसी क्रम में वर्ष 2015 में प्रगति पोर्टल की शुरुआत हुई, जो आज बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा के साथ-साथ नई कार्य संस्कृति का उदाहरण बन चुका है। इसकी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय से की जा रही है, जिससे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रगति पोर्टल के जरिए विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और राज्यों के बीच तालमेल मजबूत हुआ है और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आई है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से ही आज सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में गुजरात में नागरिक शिकायतों और जवाबदेही के लिए विकसित की गई व्यवस्था का ही राष्ट्रीय स्वरूप आज प्रगति पोर्टल है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के माध्यम से 86 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें से 377 प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं। कुल 3152 मामलों में से 2958 मुद्दों का समाधान हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए प्रगति पोर्टल गेम-चेंजर साबित हुआ है और प्रदेश आज देश के ग्रोथ इंजन के रूप में उभरकर सामने आया है। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना भी उपस्थित रहे।
