
भारत विविधताओं का देश है, जहां विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों की गूंज हर कोने में सुनाई देती है। इन्हीं पर्वों में एक विशेष स्थान रखता है “बड़ा मंगल”। यह पर्व उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह न केवल आस्था और श्रद्धा का पर्व है, बल्कि मानव सेवा और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी बन चुका है।
बड़ा मंगल क्या है?

बड़ा मंगल, ज्येष्ठ मास के मंगलवार को मनाया जाने वाला एक विशेष हनुमान भक्तिपूर्ण पर्व है। यह केवल एक दिन नहीं होता, बल्कि पूरे ज्येष्ठ माह में जितने भी मंगलवार आते हैं, उन्हें “बड़ा मंगल” के रूप में मनाया जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से की जाती है और जगह-जगह भंडारे (लंगर) लगाए जाते हैं, जिनमें श्रद्धालुओं को प्रसाद, भोजन और शीतल जल वितरित किया जाता है।
बड़े मंगल का धार्मिक महत्व:

बड़ा मंगल हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और सेवा भावना से जुड़ा हुआ पर्व है। हनुमान जी को संकटमोचन, रामभक्त, और अजर-अमर देवता माना जाता है। ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार को विशेष रूप से हनुमान जी का दिन माना जाता है। इस दिन जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से हनुमान जी की पूजा करता है, उसे संकटों से मुक्ति मिलती है और जीवन में नई ऊर्जा प्राप्त होती है।
स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। भक्तजन व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना करते हैं और भंडारे आयोजित करते हैं।
बड़ा मंगल और लखनऊ:

हालांकि बड़ा मंगल उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मनाया जाता है, लेकिन लखनऊ में इसका उल्लास अनुपम और अद्वितीय होता है। लखनऊ में हर वर्ष ज्येष्ठ के मंगलवार को सैकड़ों भंडारे लगाए जाते हैं। छोटे-बड़े मंदिर, सड़कों के किनारे, बाजारों, और गलियों तक में लोग पूरी श्रद्धा से भंडारा सेवा करते हैं।
इस दिन लखनऊ की सड़कों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। लोग दूर-दूर से आते हैं और बिना किसी भेदभाव के सभी को भोजन, जल और प्रसाद वितरित किया जाता है। यह त्योहार सामाजिक समरसता, सौहार्द और सेवा भावना का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
बड़े मंगल की उत्पत्ति से जुड़ी लोककथाएं:
बड़े मंगल की शुरुआत को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, ब्रिटिश शासनकाल में एक अंग्रेज अधिकारी की पत्नी बीमार हो गई थी। तमाम इलाज के बाद भी जब वह ठीक नहीं हुई, तो एक स्थानीय भक्त ने उन्हें हनुमान जी की कृपा के बारे में बताया। अंग्रेज महिला ने हनुमान जी से प्रार्थना की और मंगलवार को व्रत रखकर पूजा की। कुछ ही समय में उसकी तबीयत ठीक हो गई। उसने इस चमत्कार से प्रभावित होकर लखनऊ में भंडारा करवाया और तभी से यह परंपरा बड़े मंगल के रूप में चल पड़ी।
बड़े मंगल के आयोजन और परंपराएं:
- पूजा-पाठ और व्रत:
इस दिन लोग प्रातः स्नान कर व्रत रखते हैं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करते हैं और मंदिर जाकर दर्शन करते हैं। - मंदिरों में विशेष सजावट:
हनुमान मंदिरों को फूलों, दीपों और पताकाओं से सजाया जाता है। विशेष आरती होती है और प्रसाद वितरित किया जाता है। - भंडारा सेवा:
लोग सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से भंडारे का आयोजन करते हैं। इसमें खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी, बूंदी, हलवा, शरबत आदि वितरित किया जाता है। - सामाजिक सहयोग और उत्सव:
इस पर्व में हर वर्ग और समुदाय के लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। यह पर्व जाति, धर्म, भाषा और वर्ग के भेदभाव को मिटाकर मानवता को जोड़ता है।
बड़ा मंगल और सामाजिक चेतना:
बड़ा मंगल केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, यह समाज में सेवा, सहयोग और परोपकार की भावना भी पैदा करता है। इस दिन लोग दान-पुण्य करते हैं, निर्धनों को भोजन कराते हैं, प्यासों को जल पिलाते हैं और यह सब बिना किसी दिखावे के किया जाता है। यह पर्व समाज को संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने का कार्य करता है।
आधुनिक युग में बड़ा मंगल:
आज के तकनीकी और भागदौड़ भरे जीवन में भी बड़ा मंगल की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। उल्टे, युवा वर्ग, कॉरपोरेट समूह और स्वयंसेवी संस्थाएं भी इसमें हिस्सा लेने लगी हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग आयोजन की जानकारी साझा करते हैं और बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं। सरकार और प्रशासन भी बड़े मंगल के आयोजनों को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद करता है। ट्रैफिक कंट्रोल, जल वितरण, चिकित्सा सहायता और सफाई आदि की व्यवस्था की जाती है।
बड़ा मंगल का संदेश:
बड़ा मंगल हमें सिखाता है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सहयोग का माध्यम भी है। यह पर्व हमें आत्मनिर्भरता, परोपकार और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से जोड़ता है।
बड़ा मंगल केवल लखनऊ का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की सेवा परंपरा का जीवंत उदाहरण है। यह पर्व भक्ति के साथ-साथ बंधुत्व, समर्पण और सहिष्णुता की भावना को भी प्रबल करता है। जब कोई व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के किसी अनजान को भोजन कराता है या जल पिलाता है, तो वहां केवल भक्ति ही नहीं, मानवता की सबसे ऊँची मिसाल कायम होती है। ऐसे पर्व हमारी संस्कृति को मजबूत करते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि धर्म और सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए बड़ा मंगल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि एक जनांदोलन है—जो हर साल भक्ति और समाजसेवा के रंग में पूरे उत्तर भारत को रंग देता है।
मार्कण्डेय सिंह