ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अदालत की अवमानना के मामले में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने बुधवार को छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह मामला उनके द्वारा कथित रूप से सोशल मीडिया पर प्रसारित एक आपत्तिजनक ऑडियो क्लिप से जुड़ा है।
ऑडियो क्लिप बनी सजा की वजह
‘डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मोजुमदार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस ऑडियो क्लिप की समीक्षा के बाद फैसला सुनाया। ऑडियो में शेख हसीना कथित तौर पर गोविंदगंज उपजिला के पूर्व अध्यक्ष शकील अकांदा बुलबुल से बातचीत में कहती सुनी गईं, “मेरे खिलाफ 227 मामले दर्ज हैं, इसलिए मुझे 227 लोगों को मारने का लाइसेंस मिल गया है।” अदालत ने इस बयान को न्यायपालिका की अवमानना और उसके सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाला माना। न्यायाधिकरण ने इसे एक गंभीर मामला बताते हुए सजा का एलान किया।
सहअभियुक्त को भी सजा
शकील अकांदा बुलबुल, जो कि प्रतिबंधित छात्र संगठन से जुड़े रहे हैं, को भी उनकी भूमिका के लिए दो महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। दोनों की सजा तब से लागू मानी जाएगी जब वे अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे या उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
भारत में हैं शेख हसीना
उल्लेखनीय है कि शेख हसीना पिछले वर्ष 5 अगस्त को छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के चलते सत्ता से हटाए जाने के बाद भारत के लिए रवाना हो गई थीं और फिलहाल नई दिल्ली में कड़ी सुरक्षा के बीच रह रही हैं। यह पहली बार है जब उन्हें किसी मामले में दोषी करार दिया गया है।
फोरेंसिक जांच और कानूनी प्रक्रिया
ऑडियो क्लिप की आवाज़ की पुष्टि बांग्लादेश की आपराधिक जांच विभाग (CID) द्वारा फोरेंसिक जांच के माध्यम से की गई थी। इसके बाद ICT के मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम ने 30 अप्रैल को शेख हसीना और शकील बुलबुल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। 15 मई तक जवाब देने के आदेश के बावजूद जवाब नहीं मिलने पर, 25 मई को न्यायाधिकरण ने दोनों को समन भेजा। अदालत ने ‘न्याय के हित में’ शेख हसीना के लिए एक वकील नियुक्त किया और एवाई मशिउज्जमां को एमिकस क्यूरी (अदालत का मित्र) नियुक्त कर सुनवाई पूरी करवाई।
पुराने न्यायाधिकरण से बनी नई चुनौती
गौरतलब है कि जिस अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने यह सजा सुनाई है, उसकी स्थापना 2010 में अवामी लीग सरकार ने 1971 के युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए की थी। लेकिन पिछले साल अगस्त में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद अंतरिम सरकार ने इसी न्यायाधिकरण के तहत शेख हसीना और उनके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवा दिए। अब तक शेख हसीना के खिलाफ तीन गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से एक वारंट मानवता के खिलाफ अपराध के पांच आरोपों पर आधारित है, जो जुलाई में हुए विद्रोह को दबाने में उनकी भूमिका से जुड़ा है।
अवामी लीग पर भी शिकंजा
अंतरिम सरकार ने हाल में एक संशोधन पारित कर, अवामी लीग के खिलाफ एक राजनीतिक दल के रूप में मुकदमा चलाने की कानूनी अनुमति दी है। मुकदमे के निपटारे तक पार्टी की सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह घटनाक्रम न केवल बांग्लादेश की राजनीति में भूचाल लाया है, बल्कि शेख हसीना की वापसी और राजनीतिक भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।