
अहमदाबाद। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम बापू को सुप्रीम कोर्ट से चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत मिलने के बाद 10 साल बाद अहमदाबाद के साबरमती स्थित अपने आश्रम पहुंचे। जोधपुर जेल से रिहा होकर गुजरात लौटे आसाराम को 31 मार्च तक सशर्त जमानत मिली है।
जमानत की शर्तों के तहत उन्हें अनुयायियों से मिलने की अनुमति नहीं है, लेकिन जैसे ही उनके मोटेरा स्थित आश्रम में आने की खबर फैली, बड़ी संख्या में अनुयायी वहां जुट गए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए चौकसी बढ़ा दी है और 24×7 गश्त शुरू कर दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
आश्रम के विवादों से जुड़ी छवि
आसाराम का अहमदाबाद स्थित आश्रम पहले से ही कई विवादों में रहा है। इसमें दीपेश-अभिषेक की रहस्यमय मौत, दुष्कर्म के मामले और अनुयायियों के कारण उत्पन्न विवाद शामिल हैं। इन विवादों को देखते हुए पुलिस विशेष सतर्कता बरत रही है।
आसाराम पर लगे आरोप और सजा
आसाराम को अप्रैल 2018 में जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद अप्रैल 2019 में उनके पुत्र नारायण साईं को भी बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया।
पुलिस का सतर्क प्रबंधन
आसाराम के आश्रम लौटने के बाद अनुयायियों की भीड़ और संभावित विवाद को देखते हुए चांदखेड़ा पुलिस ने कड़ा सुरक्षा प्रबंध किया है। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि जमानत की शर्तों का पालन हो और कोई नया विवाद न खड़ा हो।
सुप्रीम कोर्ट की इस सशर्त जमानत के साथ आसाराम का अहमदाबाद लौटना फिर से सुर्खियों में है। प्रशासन और पुलिस उनके आश्रम में बढ़ती भीड़ और सुरक्षा स्थितियों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।