
• नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ की 7वीं बैठक में शामिल हुए प्रधानमंत्री
• डॉल्फिन, एशियाई शेर संरक्षण और इंटरनेशनल बिग कैट्स एलायंस पर हुई चर्चा
जूनागढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में एशियाई शेरों की गणना इस साल मई में कराने की घोषणा की। उन्होंने गुजरात के जूनागढ़ में वन्यजीवों के लिए राष्ट्रीय रेफरल केंद्र की आधारशिला भी रखी। इसके साथ ही, चीता संरक्षण योजना का विस्तार, डॉल्फिन और शेरों के संरक्षण प्रयासों को तेज करने की भी घोषणा की।
वन्यजीव संरक्षण को लेकर अहम फैसले
प्रधानमंत्री गुरुवार को सासन गिर राष्ट्रीय उद्यान का दौरा करने के बाद नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (NBWL) की 7वीं बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में वन्यजीव संरक्षण की सरकारी पहलों की समीक्षा की गई और प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलिफेंट, प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड जैसे प्रमुख कार्यक्रमों की उपलब्धियों पर चर्चा हुई।
बैठक में डॉल्फिन और एशियाई शेर संरक्षण, इंटरनेशनल बिग कैट्स एलायंस की स्थापना और जंगलों में लगने वाली आग, मानव-पशु संघर्ष जैसे मुद्दों के समाधान पर भी मंथन हुआ।
देश की पहली रिवरिन डॉल्फिन आकलन रिपोर्ट जारी
प्रधानमंत्री मोदी ने देश की पहली रिवरिन डॉल्फिन आकलन रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 6,327 डॉल्फिन पाई गई हैं। यह सर्वेक्षण आठ राज्यों की 28 नदियों में किया गया और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक डॉल्फिन दर्ज की गईं, इसके बाद बिहार, पश्चिम बंगाल और असम का स्थान रहा।
मोदी ने घड़ियाल की घटती आबादी पर चिंता व्यक्त की और इसके संरक्षण के लिए नए प्रोजेक्ट की घोषणा की। उन्होंने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की और गिर के सिंह व चीता संरक्षण की सफलता की कहानी साझा की।
एशियाई शेरों की गणना मई 2025 में
बैठक में प्रधानमंत्री ने मई 2025 में एशियाई शेरों की गणना कराने का ऐलान किया। एशियाई शेरों की आबादी का आकलन हर पांच साल में एक बार किया जाता है और पिछली गणना 2020 में हुई थी।
वन्यजीव संरक्षण के लिए नई पहल
प्रधानमंत्री मोदी ने परंपरागत ज्ञान का दस्तावेजीकरण करने और इसे अन्य राष्ट्रीय उद्यानों व अभ्यारण्यों के लिए एआई की मदद से संरक्षित करने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने वन्य औषधियों के शोध और दस्तावेजीकरण की भी सलाह दी।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने फ्रंटलाइन वन कर्मचारियों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए बाइकों को हरी झंडी दिखाई और गिर में फील्ड लेवल के कार्यकर्ताओं से बातचीत की। इसके बाद वे राजकोट के लिए रवाना हुए और फिर दिल्ली लौट गए।