
इलाहाबाद हाईकोर्ट कूड़ेदान नहीं है: अनिल तिवारी
प्रयागराज। दिल्ली हाईकोर्ट के एक जज के बंगले में 15 करोड़ रुपये मिलने के बाद न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को पुनः इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित किए जाने को लेकर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में भारी नाराजगी देखी जा रही है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इलाहाबाद हाईकोर्ट कोई कूड़ादान नहीं है कि यहां कुछ भी फेंक दिया जाए।” इस निर्णय पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उन्होंने सोमवार को आमसभा की बैठक बुलाई है और स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी स्थिति में बार एसोसिएशन उन्हें यहां कार्य करने नहीं देगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो न्यायिक कार्य भी ठप कर दिया जाएगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट को कूड़ेदान समझने पर उठे सवाल
अनिल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि “क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट कूड़ादान है?” यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की भारी कमी बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से नई नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बार एसोसिएशन से कभी भी न्यायाधीशों की नियुक्ति के संदर्भ में परामर्श नहीं लिया जाता, जिससे यह प्रतीत होता है कि पात्रता का आकलन उचित मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि “कहीं न कहीं कोई ऐसी खामी है, जिसने भ्रष्टाचार को जन्म दिया और इससे न्यायपालिका में जनता का विश्वास डगमगाने लगा है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कई बार इलाहाबाद हाईकोर्ट को लेकर “कुछ गड़बड़ है” जैसी टिप्पणी की है, जो इस पूरे मामले को और गंभीर बनाती है।
न्यायाधीशों की कमी बनी बड़ी समस्या
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने न्यायाधीशों की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि महीनों तक नए मामलों की सुनवाई नहीं हो पाती, जिससे न्याय में देरी होती है और आम जनता का कानून में विश्वास कमजोर हो रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को किसी भी तरह के स्थानांतरण का केंद्र बना दिया जाए। बार एसोसिएशन ने इस मुद्दे को लेकर आकस्मिक आम सभा बुलाने का निर्णय लिया है, ताकि इस पर उचित कदम उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इन सभी घटनाक्रमों के पीछे इलाहाबाद हाईकोर्ट को विभाजित करने की साजिश रची जा रही है। “हम इस साजिश के खिलाफ अंतिम दम तक लड़ेंगे,” तिवारी ने कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने रिक्तियों को भरने की आवश्यकता जताई
अनिल तिवारी ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की भारी कमी और लंबित मामलों की गंभीरता पर चिंता व्यक्त की है। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि “एक न्यायाधीश के पास 15,000 से 20,000 तक मामले लंबित हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।” खंडपीठ ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से इस समस्या का संज्ञान लेने और प्रशासनिक स्तर पर उचित कदम उठाने की अपेक्षा जताई है। इस संदर्भ में अनिल तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का उद्देश्य न्यायपालिका की मजबूती है, न कि इलाहाबाद हाईकोर्ट को कूड़ेदान बना देने की व्यवस्था।
जस्टिस यशवंत वर्मा का स्थानांतरण और बैकग्राउंड
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश रह चुके हैं और अक्टूबर 2021 में उनका स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट में हुआ था। इससे पहले, वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। बार एसोसिएशन का कहना है कि न्यायपालिका की साख को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता जरूरी है और स्थानांतरण से जुड़े फैसले सुविचारित और न्यायसंगत होने चाहिए।