कोपेनहेगन। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को डेनमार्क के प्रमुख दैनिक ‘पोलिटिकेन’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई कश्मीर विवाद का हिस्सा नहीं, बल्कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें पाकिस्तान से आए आतंकवादियों द्वारा 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या की गई थी।
डॉ. जयशंकर ने पश्चिमी देशों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भारत की सीमा का बार-बार उल्लंघन करने वाले पाकिस्तान को यूरोपीय लोकतांत्रिक देश दशकों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समर्थन देते आए हैं, भले ही वहां सैन्य तानाशाही का शासन रहा हो। उन्होंने कहा, “आप सीमाओं की संप्रभुता की बात करते हैं, तो शुरुआत हमारी सीमाओं से क्यों नहीं होती? हमें हमेशा यह कहा गया कि हमें अपनी समस्याएं खुद हल करनी होंगी, तो हमने वैसा ही किया।”
रूस से ईंधन आयात को लेकर भी जयशंकर ने दोहराया कि यूरोप खुद रूस से तेल-गैस खरीदता रहा है, लेकिन विकासशील देशों पर नैतिकता का बोझ डालता है। उन्होंने कहा, “रूस पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद यूरोप ने पश्चिम एशियाई देशों से ऊंचे दामों पर तेल खरीदना शुरू कर दिया, जिससे वैश्विक ईंधन कीमतें बढ़ गईं और कई गरीब देश इन कीमतों को वहन नहीं कर सके।” विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत की विदेश नीति और आतंकवाद के खिलाफ उसकी कठोर प्रतिक्रिया को लेकर पश्चिमी जगत में लगातार बहस चल रही है।