
बलिया। जिले के बहुचर्चित अजय तिवारी अपहरण मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में यह मामला पूरी तरह फर्जी निकला। अजय तिवारी ने अपने बेटे से मारपीट करने वालों को फंसाने और उन्हें जेल भिजवाने की मंशा से खुद के अपहरण की झूठी साजिश रची थी। अब पुलिस ने अजय तिवारी और उसके परिवार के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चार मई की सुबह सुखपुरा थाना क्षेत्र के घोसवटी गांव से अजय तिवारी के परिजनों ने डायल 112 पर सूचना दी थी कि 10-15 बाइक सवारों ने उनका अपहरण कर लिया है। इस सूचना के आधार पर गांव के ही चन्द्रमा यादव समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने नगर क्षेत्राधिकारी श्यामकांत और प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार दुबे के नेतृत्व में टीम बनाकर अजय तिवारी की तलाश शुरू की। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी थी तभी सोमवार की शाम अजय तिवारी खुद पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गया।
मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी ओमवीर सिंह ने बताया कि अजय तिवारी ने कबूल किया कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वह खुद ही घर छोड़कर चला गया था। तिवारी ने बताया कि 30 अप्रैल को उसके बेटे महामृत्युंजय तिवारी और परिजनों के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद वह मानसिक रूप से परेशान था। इसी वजह से चार मई की रात एक से दो बजे के बीच वह पत्नी को बताकर पैदल ही घर से निकल गया और खेतों के रास्ते बलिया होते हुए गंगा किनारे-किनारे जमनिया के चंदौली बॉर्डर तक चला गया।
कुछ दिन बाद जब उसे यह एहसास हुआ कि उसके जाने से परिवार परेशान होगा, तो वह वापस लौट आया। जमनिया से ट्रेन पकड़कर बक्सर पहुंचा और वहां से ऑटो से बलिया आया। बलिया से नारायणपाली जाकर कुछ परिचितों से मिला, जिन्होंने उसे बताया कि उसके घरवालों ने अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह सुनते ही अजय तिवारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और सारा सच बता दिया। एसपी ने कहा कि अजय तिवारी पर झूठी कहानी गढ़कर पुलिस को गुमराह करने और बेवजह लोगों को फंसाने के आरोप में कार्रवाई की जाएगी